কণ্ঠে পারিপার্শ্বিকের মালা /করুণাসিন্ধু দে; প্রচ্ছদ: পূর্ণেন্দু পত্রী.
| मुख्य लेखकों: | , |
|---|---|
| स्वरूप: | पुस्तक |
| भाषा: | अंग्रेज़ी बंगाली |
| प्रकाशित: |
গ্রন্থজগৎ,
1370
Granthajagat, |
| विषय: |
| मुख्य लेखकों: | , |
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| स्वरूप: | पुस्तक |
| भाषा: | अंग्रेज़ी बंगाली |
| प्रकाशित: |
গ্রন্থজগৎ,
1370
Granthajagat, |
| विषय: |